June 01, 2013

दम पर दम यु पाई पाई सा जीना
फिर ज़िन्दगी ने एक करवट लेना

दर्द और शिशोपंज का रास्ता
और मंज़र का तय होना

कई बार का डगमगाना
पर हार कभी न मानना

जैसे कड़ी धूप के मौसम में
बारिश का इंतज़ार होना

March 11, 2013

एक घर, एक टिल्ला, एक समाज
 

राजस्थान के एक जिल्ला में जाने का मौका हुआ।

शहर से दूर जहाँ कोई जाना नहीं चाहता
उस जगह पर एक टिल्ले पर एक परिवार का एक घर है।

हर घर मट्टी का, हर घर की दिशा ऐसी की बहार आते ही सब कुछ खुला और साफ़ दिखाई दे
दूर दूर तक बस टिल्ले और उन पर घर और खुला आसमान।

एक घर से दुसरे घर जाने के लिए टिल्ले पार करने, पैदल
न कोई गाड़ी, न साइकिल और न ही बैलगाड़ी का काम।

हर टिल्ले पर छोटी सी सीधी ज़मीन पर या फिर ढलान या कहीं कुछ छोटा सा बांध बनाकर
हर कोई अपने ज़रुरत का खाना उगता।

और अगर हम जैसे लोग कहीं वहां पहुच जाये तो ख़ुशी ख़ुशी फल बाँट भी लेते
किसके टिल्ले पर है, किसने उगाया है इससे क्या फरक पड़ता है
मानो जैसे सब कुछ सबके लिए हो।

और

उन्हें सीखाने पहुचते है, कुछ बाबु
स्कूल, सर्टिफिकेट, कोट, सूट पहने
सब जानते, सबकुछ समझाते
विकास की गाड़ी में
इन "पिछड़े" समाज को भी खीचना चाहते
उन्हें अपने जैसा बनाना चाहते

February 17, 2013


परिवार
समाज
सरकार
व्यक्ति
या फिर
बाज़ार

कौन तय करता है?

February 09, 2013

मिटटी

 

कई सालों बाद फिर मिटटी को छुआ

उसकी खुसबू ली और उस पर चला है 


जाने ये कैसा रिश्ता है जो न होने पर सताता है

और हर बार लौटकर आता है


कई सालों तक ये रिश्ता बस कुछ पल का एहसास रहा

कभी कभी की लुत्फ़ का सिलसिला चलता रहे 


मिटटी का साथ अब फिर बनने को है

खोया हुआ एक नया रिश्ता फिर उभरने को है

January 18, 2013

नज़र

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है

तुम जो इज्ज़त हो
तुम जो लाज हो
तुम जो कमज़ोर हो
तुम जो लड़की हो

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है

तुम जो बेटी हो
तुम जो बहन हो
तुम जो अर्धांगिनी हो
तुम जो सम्पति हो

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है


तुम कहीं छूट न जाओ
 तुम कहीं निकल न जाओ
तुम कहीं घूमने न लग जाओ
तुम कहीं बोलने न लग जाओ
हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है

तुम कहीं जानने न लग जाओ 

तुम कही सपने न बुनने लग जाओ
तुम कहीं बगावत न करने लग जाओ
तुम कहीं मुक्त न हो जाओ

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है


तुम कहीं उनको सवाल न पूछने लग जाओ
तुम कहीं सब कुछ समझने न लग जाओ
तुम कहीं उन पर न हावी हो जाओ 
तुम कहीं अपनी दुनिया न बनाने लग जाओ

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है

तुम कहीं खुद पर भरोसा न करने लग जाओ
तुम कहीं मनकी न करने लग जाओ
तुम कहीं बराबरी की न सोचने लग जाओ
तुम कहीं खुद को इंसान न समझने लग जाओ

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है

परिवार समाज
कंपनी बाज़ार
मीडिया व्यापार
देश सरकार

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है