January 18, 2013

नज़र

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है

तुम जो इज्ज़त हो
तुम जो लाज हो
तुम जो कमज़ोर हो
तुम जो लड़की हो

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है

तुम जो बेटी हो
तुम जो बहन हो
तुम जो अर्धांगिनी हो
तुम जो सम्पति हो

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है


तुम कहीं छूट न जाओ
 तुम कहीं निकल न जाओ
तुम कहीं घूमने न लग जाओ
तुम कहीं बोलने न लग जाओ
हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है

तुम कहीं जानने न लग जाओ 

तुम कही सपने न बुनने लग जाओ
तुम कहीं बगावत न करने लग जाओ
तुम कहीं मुक्त न हो जाओ

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है


तुम कहीं उनको सवाल न पूछने लग जाओ
तुम कहीं सब कुछ समझने न लग जाओ
तुम कहीं उन पर न हावी हो जाओ 
तुम कहीं अपनी दुनिया न बनाने लग जाओ

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है

तुम कहीं खुद पर भरोसा न करने लग जाओ
तुम कहीं मनकी न करने लग जाओ
तुम कहीं बराबरी की न सोचने लग जाओ
तुम कहीं खुद को इंसान न समझने लग जाओ

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है

परिवार समाज
कंपनी बाज़ार
मीडिया व्यापार
देश सरकार

हर कोई तुम पर नज़र रखता है
हर कोई हर दम नज़र रखता है

December 27, 2012

जवाब तो देना होगा

इस दौड़ में होने का
अपनों को पीछे छोड़ने का

जवाब तो देना होगा

खुले माहौल के सिकुड़ने का
आपस के विश्वास खोने का

जवाब तो देना होगा

सब कुछ को जागीर समझने का
अपने आप में बेखुद खोने का

जवाब तो देना होगा

इन बदलते हालात का
इस भीड़ बनते इंसान का

जवाब तो देना होगा

December 20, 2012



एक कार्यशाला
पांच दिन
तेईस लोग
अठरा महिलाएं

नयी पहचान
पुराने सवाल
वही संघर्ष
साथ साथ

हसना गाना
रोना छेड़ना
दिल के दर्द
ज़िन्दगी के पल

हार न मानना
जिंदा रहना
उमंग उम्मीद
से कदम बढ़ाना

रास्ता निकलना
थक न जाना
लड़ते रहना
हार न कहना

जीने की इच्छा
खुद पर विश्वास
क्या कहना क्या कहना
सलाम बहना सलाम बहना

November 24, 2012

कुछ लोग बाज़ नहीं आते

हर बार अलग निकल जाते
कुछ करने को चाहते

कुछ लोग बाज़ नहीं आते

नए सपने बुनते
भूले रास्ते ढूँढ़ते

कुछ लोग बिलकुल बाज़ नहीं आते

मुश्किल सवाल पूछते
नए अर्थ तलाशते

कुछ लोग बाज़ नहीं आते

बना बनाया छोड़ते
नियमो को तोड़ते

सच में कुछ लोग बाज़ नहीं आते

दुनिया की नज़रों में
दीवाने कहलाते

फिर भी कुछ लोग बाज़ नहीं आते

घर परिवार समाज उमीदे
इन सब से दूर निकल जाते

कुछ लोग कभी बाज़ नहीं आते

हर दम मन की करने
की हिम्मत कैसे जुटा पाते

कुछ लोग बाज़ नहीं आते

November 17, 2012

गुफ्तगू

एक बच्चे के साथ बिताये कुछ मज़ेदार पल।


जीजू ने बच्चे से पूछा पत्तों का खेल खेलोगे? बच्चा फटाफट राज़ी हो गया।
शर्त लगी की अगर वो पत्तों को कहे अनुसार लगा देता है तो मुह माँगा इनाम पायेगा।
बच्चा ख़ुशी ख़ुशी पत्तों के बीच खो गया। एक से दस तक उन्हें जोड़ने लगा।
करीब 20 मिनट तक उसे दुनिया की कोई खबर नहीं रही।
 काम पूरा होते ही बच्चा बेसब्री से जीजू को बुलाने लगा।
जीजू आये और उसका पूरा काम देखे उसके बीच में 
बच्चा बाकी लोगों से कहता है, "क्या मांगू, मैं?" और सोच में डूब जाता है।
जीजू आने पर छाती चौड़ी कर किया हुआ काम दिखता है।
मौजूद सभी बड़े ताली बजाकर उसका उत्साह बढ़ाते है। 
अब जीजू उसे पूछते है बोलो क्या लोगे।
बच्चा बड़ी समझदारी के साथ कहता है, "जो आप देना चाहो"।
और पूछने पर सादगी से बोलता है, "बस, बैगन की सब्जी खाने की ज़बरदस्ती कोई न करें।"


छोटे छोटे सपने
सादगी भरी इच्छाएं
बच्चे बड़ों से सीखे
या फिर बड़े बच्चों से सीखे