March 07, 2015





इख्तिलाफ

बोलना
देखना
घूमना
पहनना
दोस्ती
शादी
खाना
सोना

बड़े भैया सब देख रहे
वो सब के लिए सोच रहे है

अच्छे दिन आ गए है
अच्छे दिन आ गए है

अब हमें तुम्हे करना है क्या
है जीना बस बुत की तरह



March 02, 2015




तीखी गुफ्तगू
बच्ची, "हम कचरा बीनते है। हमें बहुत तालीफ़ होती है। हमें भी स्कूल जाना है। स्कूल में लोग हमें साथ नहीं लेते। हमें अलग ही रखते है।" 
बड़े, "तुम क्यूँ पढ़ना चाहती हो? पढ़कर कर क्या करोगी?"
बच्ची ने तुरंत जवाब दिया, "कम से कम कचरा तो नहीं चुनूंगी।"


August 02, 2014

 
ऐसा तो कई बार हुआ है
लोग पूछते है, "आप कहाँ से है?"
 
मैं पाकिस्तान से हुँ
हा, मैं पेशावर से हुँ 
 
लोग मुस्कुरा देते हैं
थोड़ा सा घबरा जाते है
 
जल्दी ही जवाब आता है
वैसे सब एक ही है!

November 08, 2013

बेमानी सा लगता है
 
सजना सवरना
बाज़ारों में फिरना
 
त्यौहार मनाना
रिवाज़ों को मानना
 
 
खोकला लगता है
 
मंदिर जाना
पूजा करना
 
शादी ब्याह पर खर्चा
और शो होना
 
 
अजब लगता है
 
इसे निभाय जाना
कभी उत्साह कम न होना
 
culture के नाम पर
इसे कभी सवाल न करना

November 03, 2013


आखिर कशमकस किस बात की है
ये संघर्ष किस चीज़ का है

बटोरने का
पाने का

जीतने का
हासिल करने का

या अपने को prove करने का?

आखिर कशमकस किस बात की है
ये संघर्ष किस चीज़ का है

जगह बनाने का
बात कहने का

डर दूर करने का
सपनो का

अपना या सभी का?

आखिर कशमकस किस बात की है
ये संघर्ष किस चीज़ का है

सुरक्षित होने का
सुकून से जीने का

दौड़ और भीड़ में न पीसने का
कुछ नया करने का, खोज ने का

या फिर कायनात का हिस्सा होने का?