May 20, 2015




"पोथी पढ़कर जग मुआ, पंडित भया न कोई"


क्या हम अपना खाना खुद उगाते है?
क्या हम अपना खाना उगा सकते है?

क्या हम अपना खाना खुद पकाते है?
क्या हम अपना खाना पका सकते है?

क्या हम अपना कपडा बूनते है?
क्या हम अपना कपडा बून सकते है?

क्या हम अपना घर खुद बनाते है?
क्या हम अपना घर बना सकते है?

क्या हम जानते है हमारे घर के नल में पानी कहाँ से आता है?
क्या हम जानते है की जो अनाज सब्ज़ी फल हम खाते है कहाँ से आते है?

क्या हम जानते है की जो बिजली हमारे घर को रोशन करती है वो कहाँ से आती है?
क्या हम जानते है की हमारी इन ज़रूरतों के लिए कौन श्रम करते रहे है?

क्या हम उनसे कभी मिले है?
क्या हम उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते है?



March 07, 2015





इख्तिलाफ

बोलना
देखना
घूमना
पहनना
दोस्ती
शादी
खाना
सोना

बड़े भैया सब देख रहे
वो सब के लिए सोच रहे है

अच्छे दिन आ गए है
अच्छे दिन आ गए है

अब हमें तुम्हे करना है क्या
है जीना बस बुत की तरह



March 02, 2015




तीखी गुफ्तगू
बच्ची, "हम कचरा बीनते है। हमें बहुत तालीफ़ होती है। हमें भी स्कूल जाना है। स्कूल में लोग हमें साथ नहीं लेते। हमें अलग ही रखते है।" 
बड़े, "तुम क्यूँ पढ़ना चाहती हो? पढ़कर कर क्या करोगी?"
बच्ची ने तुरंत जवाब दिया, "कम से कम कचरा तो नहीं चुनूंगी।"


August 02, 2014

 
ऐसा तो कई बार हुआ है
लोग पूछते है, "आप कहाँ से है?"
 
मैं पाकिस्तान से हुँ
हा, मैं पेशावर से हुँ 
 
लोग मुस्कुरा देते हैं
थोड़ा सा घबरा जाते है
 
जल्दी ही जवाब आता है
वैसे सब एक ही है!

November 08, 2013

बेमानी सा लगता है
 
सजना सवरना
बाज़ारों में फिरना
 
त्यौहार मनाना
रिवाज़ों को मानना
 
 
खोकला लगता है
 
मंदिर जाना
पूजा करना
 
शादी ब्याह पर खर्चा
और शो होना
 
 
अजब लगता है
 
इसे निभाय जाना
कभी उत्साह कम न होना
 
culture के नाम पर
इसे कभी सवाल न करना